वैचारिक चुतियापा, और “मन भठिया चित्त भुसौरी”

ख़बर वो, जो ले सबकी ख़बर...... वो विचारशील भी थे। और चूतिया भी। कहने में भी उतना ही अंतर था। जितना करने में। कभी किसी की सुनी नहीं। हमेशा अपना हाथ जगन्नाथ समझा। फिर भले ही हाथ में कोढ़ ही क्यों न हो गया हो। वो जो कर रहे हैं, जिन हाथों से कर रहे हैं, बस कर रहे हैं। किसी से कोई मतलब... [पूरी पोस्ट]
writer anupam mishra
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[08 Mar 2010 12:38 PM]

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