फिर भी आओ एक दूजे को विश करे हेप्पी वुमनस डे सभी

काव्य तरंग ओ शीतल मंद पवन तू ही तप्त ह्रदय को शीतल करनारी ह्रदय दहक उठा भीषण क्रोध की ज्वाला में जल कर उथल पुथल होती है मन में, कोई संचार नहीं रहा बदन मेंआँसू ख़त्म हो चुके है अब तो, लहू उतर आया नयनन मेंकहते बड़े फक्र से आगए इक्कीसवीं सदी में हमसंकीर्णता मन में... [पूरी पोस्ट]
writer RaniVishal

कविता

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[08 Mar 2010 10:24 AM]

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