अपने हिस्से की माफ़ी
मुझे पक्का याद था कि आज महिला दिवस है.इसे ही ध्यान में रखकर मैंने कल एक कविता की पोस्ट भी लगाई.पर जब आज स्कूल गया तो किसी ने मुझे शुभकामना नहीं दी.मैंने भी किसी से कुछ नहीं कहा.सब कुछ ऐसे रहा जैसे कोई सचमुच का ऐसा दिन भी हो सकता है जिसमें हँसी का साथ...
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शशिभूषण
क्षमा
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[08 Mar 2010 10:05 AM]



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