फैसला

मनोज -हरीश प्रकाश गुप्त सुजय की शादी में वे सारे तामझाम हुए जो उसके परिवार की मान और ठसक के अनुरूप थे। बरात में नाचनेवालियाँ न हो तो रुतबे में आँच आती है। सो, नाचनेवालियाँ भी बुलाई गईं। बरात अपने शबाब पर थी। गाजे-बाजे के साथ जगह जगह रुक कर भड़कीले गानों की... [पूरी पोस्ट]
writer करण समस्तीपुरी

लघुकथा

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[08 Mar 2010 08:00 AM]

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