मेरी पसंद....
एक गुड़िया की कई कठपुतलियों में जान हैआज शायर यह तमाशा देखकर हैरान हैख़ास सड़कें बंद हैं तब से मरम्मत के लिएयह हमारे वक़्त की सबसे सही पहचान हैएक बूढ़ा आदमी है मुल्क़ में या यों कहो—इस अँधेरी कोठरी में एक रौशनदान हैमस्लहत—आमेज़ होते हैं सियासत के क़दमतू...
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वन्दना अवस्थी दुबे
हिन्दी गज़ल
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[08 Mar 2010 07:45 AM]



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