जनानों की मर्दानगी....
महिला दिवस पर मुझे करीब डेढ़ साल पहले लिखी अपनी एक कविता याद आ रही है...उसे आप सब के साथ बांटना चाह रहा हूं....क्योंकि आधी आबादी अब पूरी दुनिया जीतने को तैयार है....आप मानें या न मानें....माँ अब तुम तैयार रहोबनने के लिए पितायकीन करोतुम उतनी ही जिम्मेदार...
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मयंक
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[08 Mar 2010 07:05 AM]



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