थोड़ा पागल हूं मैं
अपनों के नश्तरों का घायल हूं मैंलोग कहते हैं दीवाना पागल हूं मैं यह जमाना और उम्मीदे वफायारों, माफ करना मुझे थोड़ा पागल हूं मैंतन्हां हो गया हूं दुनिया की भीड़ मेंकुछ ज्यादा ही साफगोई का कायल हूं मैं...
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भारत मल्होत्रा
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[08 Mar 2010 06:18 AM]



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