छोटे और बड़े साहब-हिन्दी क्षणिकाएँ (boss culture-hindi comic poem)

 हिन्द केसरी-पत्रिका  दिन भर अपने लिए साहब शब्द सुनकर वह रोज फूल जाते हैं। मगर उनके ऊपर भी साहब हैं जिनकी झिड़की पर वह झूल जाते हैं। ——————– नयी दुनियां में पुजने का रोग सभी के सिर पर चढ़ा है। कामयाबी का खिताब नीचे से ऊपर जाता... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

अभिव्यक्तिमनोरंजनकलामस्ती

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[14 Feb 2010 03:47 AM]

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