‘‘चिड़िया रानी’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
बच्चों अर्थात् नन्हीं कलियों और सुमनों को समर्पित हैः यह “नाइस” ब्लॉग! चिड़िया रानी फुदक-फुदक कर, मीठा राग सुनाती हो।आनन-फानन में उड़ करके, आसमान तक जाती हो।।मेरे अगर पंख होते तो, मैं भी नभ तक हो आता।पेड़ो के ऊपर जा करके, ताजे-मीठे फल खाता।।जब मन करता मैं...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
बाल कविता
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[15 Feb 2010 22:47 PM]



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