“भैया! मुझको भी, लिखना-पढ़ना, सिखला दो!”(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

नन्हें सुमन “भैया! मुझको भी, लिखना-पढ़ना, सिखला दो!”भैया! मुझको भी,लिखना-पढ़ना, सिखला दो।क.ख.ग.घ, ए.बी.सी.डी, गिनती भी बतला दो।।पढ़ लिख कर मैं, मम्मी-पापा जैसे काम करूँगी।दुनिया भर में, बापू जैसा अपना नाम करूँगी।।रोज-सवेरे, साथ-तुम्हारे, मैं भी उठा करूँगी।पुस्तक लेकर... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

बालगीत

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[17 Feb 2010 21:35 PM]

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