“संगीता स्वरूप का बालगीत” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

नन्हें सुमन “चूहे की होली”  चूहा  खेल रहा था होली। रंगो की लेकर रंगोली।।भर पिचकारी उसने मारी। बिल्ली  मौसी भीगी सारी।।अब बिल्ली को गुस्सा आया। उसने चूहे को धमकाया।।चूहा थर-थर काँप रहा था।  डरकर माफ़ी  मांग रहा था।।हंस कर तब बिल्ली ये... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

बालगीत

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[18 Feb 2010 12:06 PM]

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