“भगवान एक है!" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
मन्दिर, मस्जिद और गुरूद्वारे। भक्तों को लगते हैं प्यारे।। हिन्दू मन्दिर में हैं जाते। देवताओं को शीश नवाते।।ईसाई गिरजाघर जाते। दीन-दलित को गले लगाते।। जहाँ इमाम नमाज पढ़ाता।मस्जिद उसे पुकारा जाता।।सिक्खों को प्यारे गुरूद्वारे। मत्था वहाँ टिकाते...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
बालगीत
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[19 Feb 2010 10:27 AM]



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