‘‘तितली रानी’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)

नन्हें सुमन मन को बहुत लुभाने वाली,तितली रानी कितनी सुन्दर।भरा हुआ इसके पंखों में,रंगों का है एक समन्दर।।उपवन में मंडराती रहती,फूलों का रस पी जाती है।अपना मोहक रूप दिखाने,यह मेरे घर भी आती है।।भोली-भाली और सलोनी,यह जब लगती है सुस्ताने।इसे देख कर एक छिपकली,आ जाती है... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

बालकविता

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[21 Feb 2010 09:54 AM]

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