‘‘मोबाइल फोन’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
पापा ने दिलवाया मुझको,सेल-फोन इक प्यारा सा।मन-भावन रंगों वाला,यह एक खिलौना न्यारा सा।।रोज सुबह को मुझे जगाता,मोबाइल कहलाता है।दूर-दूर तक बात कराता,सही समय बतलाता है।।नम्बर डायल करो किसी का,पता-ठिकाना बतलाओ।मुट्ठी में इसको पकड़ो और,संग कहीं भी ले...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
बाल कविता
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[22 Feb 2010 23:07 PM]



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