‘‘कौआ’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

नन्हें सुमन कौआ बहुत सयाना होता।कर्कश इसका गाना होता।।पेड़ों की डाली पर रहता।सर्दी, गर्मी, वर्षा सहता।।कीड़े और मकोड़े खाता।सूखी रोटी भी खा जाता।।सड़े मांस पर यह ललचाता।काँव-काँव स्वर में चिल्लाता।।साफ सफाई करता बेहतर।काला-कौआ होता मेहतर।।(चित्र गूगल सर्च से साभार)... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

बालकविता

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[02 Mar 2010 03:47 AM]

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