“मदारी का खेल : रानीविशाल” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
"एक खेल मदारी का" डम-डम, डम-डम डमरू बाजा। उछला-कूदा, छुटकू राजा।।खाना खाकर ताजा-ताजा।ठुमक-ठुमककर छुटकू नाचा।।वानर-राजा खेल दिखाते।बच्चे तालीखूब बजाते।। छुटकी को कर रहा इशारा।लगता सबको कितना प्यारा।।अब छुटकी भी उठकर आई।खेल-खेल में धूम...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
बालगीत
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[03 Mar 2010 05:39 AM]



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