‘‘आयी रेल-आयी रेल’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

नन्हें सुमन धक्का-मुक्की रेलम-पेल।आयी रेल-आयी रेल।।इंजन चलता सबसे आगे।पीछे -पीछे डिब्बे भागे।।हार्न बजाता, धुआँ छोड़ता।पटरी पर यह तेज दौड़ता।।जब स्टेशन आ जाता है।सिग्नल पर यह रुक जाता है।।जब तक बत्ती लाल रहेगी।इसकी जीरो चाल रहेगी।।हरा रंग जब हो जाता है।तब आगे को बढ़... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

बालकविता

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[04 Mar 2010 03:19 AM]

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