"टोपी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

नन्हें सुमन गंजापन ढकने को टोपी, मेरे सिर पर रहती है। ठिठुरन से रक्षा करती हूँ , बार-बार यह कहती है।।  देखो अपनी गाँधी टोपी, सारे जग से न्यारी है। आन-बान भारत की है ये, हमको लगती प्यारी है।।लालबहादुर और जवाहर जी ने, इसको धार लिया। भारत का सिंहासन... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

बालकविता

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[06 Mar 2010 04:12 AM]

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