“देखो एक मदारी आया।” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
देखो एक मदारी आया। अपने संग लाठी भी लाया।।डम-डम डमरू बजा रहा है।भालू, बन्दर नचा रहा है।।लम्बे काले बालों वाला।भालू का अन्दाज निराला।।खेल अनोखे दिखलाता है।बच्चों के मन को भाता है।। वानर है कितना शैतान।पकड़ रहा भालू के कान।।यह अपनी धुन में ऐँठा...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
बालकविता
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[07 Mar 2010 05:45 AM]



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