"लोग आते गये और कारवाँ बनता गया"

मेरी अंतराभिव्यक्ति वेलेंटाइन डे ढेर सारी हलचल लिये इस बार फिर एक नए रंग में उपस्थित हुआ. हर बार की तरह इस बार भी पक्ष और विपक्ष के ढेर सारी बहसों का साझीदार रहा. इस बार कुछ नया करने का मन बना पक्ष-विपक्ष सबकी एक साथ बैठकर सुनने की योजना बना डाली. योजना तो सही थी लेकिनं... [पूरी पोस्ट]
writer Harshkant tripathi"Pawan"
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[19 Feb 2010 07:42 AM]

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