कितना बदल गया इंदौर-1

मेरी कही सर्राफ़े की गलियाँ, राजबाड़ा का आँगन सब कुछ है. सुबह-सुबह मंदिर की घंटियाँ हैं.सड़कों के किनारे लगे फूलों के ढेर हैं. अगरबत्तियों की खुशबू है. घर के बाहर ताज़ी सब्ज़ियों की आवाज़ लगाते मोबाइल वेजीटेबल शॉपकीपर. जिनके ठेलों पर मंडियों से आए ताज़े टमाटर,... [पूरी पोस्ट]
writer अखिलेश शर्मा

इंदौर

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[22 Feb 2010 05:04 AM]

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