ए सपनों की परी,,,,,,,
देवेश प्रतापए सपनों की परीतू कंहा रहती है ।कभी मेरे बसेरे मेंआया करो ॥बैठेंगे खूब बातें करंगे ।हमें अपने भी किस्से सुनायाकरो ॥सपनों की दुनिया में साथसैर करंगे ।मेरे ख्वाबो को भी सजायाकरो ॥तेरे आने से दुनियां हँसी हो जाती है।मेरी दुनिया में भी फूल...
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देवेश प्रताप
दिल से
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[16 Feb 2010 00:53 AM]



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