तन्हाई कहती है .....

विचारों का दर्पण देवेश प्रतापतन्हाई अपनी व्यथा सुनाते हुए कहती है ......अक्सर वो मुझसे ख़फा रहते है । जाने क्यों मुझसे जुदा रहते है ॥ मैं दामन विछा देती हूँउनकी ख़ुशी के लिएजब उनके जीवन केफूल मुरझा जाते है ॥ मचल जाती हूँउनकी एक हंसी के लिएसहन होता नहीं ,ये देख करजब वो... [पूरी पोस्ट]
writer देवेश प्रताप

तन्हाई

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[19 Feb 2010 22:31 PM]

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