होली या ठिठोली !

बैसवारी baiswari हम तो यारों रंग ते खेली,वी ताने बन्दूक।हमरी ते तो पानी निकरै,औ उनकी ते हूक। ।हमरे रंग मिलावटी ,उनके असली लाल।बच्चे भी अब डर रहे, देख अबीर-गुलाल । ।होली आते ही हुए ,वो तो मालामाल।नकली मावा भले ही ,सबको करे हलाल। ।गुझिया,खुरमा खो गए बचपन के पकवान।फागुन में... [पूरी पोस्ट]
writer संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI

कविता

views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[28 Feb 2010 04:53 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix