अजीब दास्ताँ है ये...(हास्य-वयंग्य)
राम राम जी!जीवन भी कई बार अजीब परिस्थितियों से दो-चार करवा देता है!और हर किसी को!मुझे तो ऐसा ही लगता है!अब कुंवर जी को ही लो,फंस गए बेचारे ऐसी ही परिस्थिति में!मजे कि बात ये कि अपने ही घर में!पौह का महीना हो तो बताने कि...
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kunwarji's
(हास्य-वयंग्य)
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[13 Feb 2010 05:54 AM]



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