अभी मै गिरा कहाँ हूँ...(कविता)
अभी मै गिरा कहाँ हूँ,बस गिरने वाला हूँ,,,,,,,,,,,अभी तो ना दुत्कारो मुझे,उपेक्षित भी ना करो, पास आने दो मुझे और मेरे पास आते भी ना डरो,अभी तो निर्दोष हूँ,सच्चे-झूठे दोष भी ना धरो,अच्छा-बुरा सोच कर अब भी डरता हूँ मै,पाप के डर से ही कई पुण्य भी तो...
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kunwarji's
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[04 Mar 2010 07:41 AM]



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