बुरा न मानो होली है

दर्पण बुरा न मानो होली है ये होली भी क्या होली है चेहरे सब लाचार  से रोनक तो गुम  हो गयी लोग लगें बीमार से  ज़हरीले रंगों से भैयाअंगों को बहुत ख़तरा बेचनेवाले मुनाफा चाहें  न मौत खरीदें बाज़ार से इस होली में... [पूरी पोस्ट]
writer SURINDER RATTI

कविता

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[01 Mar 2010 02:42 AM]

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