मासूम चाहत
सोते- सोते,कभी रोती है,कभी हंसती है।कच्चे दूध सी,मेरी मासूम चाहतमहकती है।कभी पेट पर,कभी छाती पर,गुदगुदाते हैंउसके नन्हें पांव।सच का सूरज,जब जलाता जिया,किलकारी बनकरमेरी मासूम चाहतबरसती है।कलेजे के टुकड़े को,कलेजे से बांधूं।आंखों के तारे को,आंखों से...
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chetna
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[16 Feb 2010 10:20 AM]



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