शुरूआत

amitraghat जीवन से ऊबकर व्यवस्था से निराश चट्टान के कगर पर खड़ा सामने वितत-विशाल-औंडा-ताल पूछा स्वयं से,”सोच ले फिर से, क्या मरना ज़रूरी है?” ”हाँ,” -दू टूक-सा दिया मैंने उत्तर और कूद पड़ा झट से; तीखी थी छलाँग, ताल ने भी नहीं मचाया शोर ना ही कहीं उठी हिलोर व्यवस्था... [पूरी पोस्ट]
writer Amitraghat
views
4
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[11 Feb 2010 07:54 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix