Holi

साहित्य सर्जक ननुआ ने तो भंग चढाई धोती फाड़ी ललुआ ने कर रुमाल धुतिया के भैया ताल लगे कलुआ ने दिल्ली गूंजी सब जग गूंजा खूब सुने अगुआ ने बड़ी में के गिर चरणों में धोक लगाईं मनुआ ने चीनी मिल रही पांच रुपया कडुआ तेल मुफ्त में है डाल मिल रही दो दो रुपया रोटी संग मुफ्त में... [पूरी पोस्ट]
writer vedvyathit
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[21 Feb 2010 09:57 AM]

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