हृदय में ही ईश्वर रहता है
सरल हृदय सदभाव लिए, सदैव सरिता सा बहता है ।अभिमान सदा पैरो को पसारे, उसकी राहों में रहता है ।।अभिमान ने ज्ञान को नष्ट किया, ना ज्ञानी कभी अभिमानी हुए ।दे रोशनी दीया भी अन्धकार हरे, ना चूल्हे की लो का किनारा बना ।।स्नेह से अपना ले गैरो को भी, सच्चे अर्थ...
[पूरी पोस्ट]
RaniVishal
कविता
3
0
0
0
0
[21 Feb 2010 15:33 PM]



Shuffle








