तुम प्रेम का आधार हो

काव्य तरंग प्रिय तुम प्रेम प्रतीक होतुम प्रेम का आधार होतुम ही तो हो पथ प्रेम कातुम ही प्रेम का द्वार होसर्द सुलगती रातों मेंशीतल मृदु अहसास तुममधुर स्वप्न हो नयनों केजटिल जीवन की आस तुमजलती बुझती चाहों मेंतुम एक अमर अभिलाषा होघोर निराशा के रुक्ष्ण क्षणों मेंतृप्त... [पूरी पोस्ट]
writer RaniVishal

कविता

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[07 Mar 2010 20:38 PM]

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