कल रात फिर ख़्वाबो में

काव्य तरंग कल रात फिर ख़्वाबो मेंयू हो गयाउनसे सामनाबेकरार हो मचल उठेमुश्किल थादिल को थामनाकोमल लबों परठहरे हुए सेकुछ भीगे शब्दअब भी थे वही....आँखों में आँखें डाल करअरमानो को उढ़ेलानाभावनाओं का आवेगफिर से अहसासबुदबुदाने लगा..पलकों की आड़ से हुएनज़रो के मीठे... [पूरी पोस्ट]
writer RaniVishal

कविता

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[23 Feb 2010 19:10 PM]

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