तेरे चहरे में उस खुदा की इबारत नज़र आती है

काव्य तरंग मेरी नन्ही परी अनुष्कालोग कहते हैं कि गुज़रा ज़माना कभी लौट कर आता नहींलेकिन तेरी हर शरारत में अपना बचपन मैं जिया करती हूँयूँ तो कर देते हैं बैचेन छुपे हुए कुछ गम जो यादों में मेरीपर तेरी नटखट सी हँसी इस जीवन में सुकून भर देती हैंना देखा हैं कभी भी कही उस... [पूरी पोस्ट]
writer RaniVishal

खुदा की इबारत

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[01 Mar 2010 19:44 PM]

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