नर्तकों के देवता होने का वहम-हिन्दी क्षणिकाऐं

 दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका विदुषकों के विद्वान और नर्तकों के देवता होने का वहम पूरे ज़माने को हो गया है, झूठ के सहारे खड़ा है दौलत का महल, इज्जत पाने के लिये, होने लगी सौदे की पहल, ईमान सभी का सो गया है। ———– सर्वशक्तिमान ने दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

हिन्दीअभिव्यक्तिअनुभूतिइंटरनेट

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[21 Feb 2010 00:46 AM]

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