डबल बेड

काव्य कलश उठ डबल बेड से बंद कर रेड़ियो, पंखा, टी. वी., टेप ,कुलर और निकल देहलीज से बाहर लेकर दोपहर का टिफिन करके खून का पानी बहादे पसीना खरीद मेहनत के बाजारों से उन हीरों के बदले रोटीजल्दि लौट आना घर मुस्कुराती हुई संध्या के साथ जहां उसी देहलीज पर सुबह से खड़े... [पूरी पोस्ट]
writer amritwani.com

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[24 Feb 2010 12:32 PM]

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