पनघट के प्रहरी

काव्य कलश सुर्खइतना कह देतें प्यास कितनी गहरी हैपनिहारिनों की चलेंबता देती हैंगागर कितनी भरी हैयुगो-युगो से होती आईप्यास परछलकती गागर कुर्बानमगरफिर भी क्योंघट-घट परपनघट के प्रहरी हैं ।... [पूरी पोस्ट]
writer amritwani.com

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[25 Feb 2010 07:32 AM]

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