ओटेमेटिक घड़ी

काव्य कलश ऐ मेरीओटेमेटिक घड़ीकाश मैंने तुझसेइतना ही सीख लिया होताबस मुझे चलना हैतेरी तरहसर्दी-गर्मी-बरसातआंधी-तूफांदिन हो या रातराह मेंफूल हो या कांटेहर हाल में चलना हैहर दिनदिन-रात चलना हैअगरइतना ही सीख लिया होतातो आजमेरी घड़ीइतनी नाजुक नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer amritwani.com

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[07 Mar 2010 07:32 AM]

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