जनाब सरवर की एक ग़ज़ल : ग़ज़ल 13
ग़ज़ल १३ शब-ए-उम्मीद है ,सीने में दिल मचलता है हमारी शाम-ए-सुख़न का चिराग़ जलता है न आज का है भरोसा ,न ही ख़बर कल की ज़माना रोज़ नयी करवटें बदलता है अजीब चीज़ है दिल का मुआमला यारों ! सम्भालो लाख, मगर ये कहाँ सम्भलता है न तेरी दोस्ती अच्छी ,न दुश्मनी अच्छी न...
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आनन्द पाठक
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[21 Feb 2010 09:53 AM]



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