जनाब "सरवर" की दो गज़लें
एक ग़ज़ल : डूबता है दिल कलेजा मुँह को आया जाए है...... डूबता है दिल कलेजा मुँह को आया जाए है हाय! यह कैसी क़ियामत याद तेरी ढाए है ! इश्क़ की यह ख़ुद फ़रेबी!अल-अमान-ओ-अल हफ़ीज़ ! जान कर वरना भला खु़द कौन धोखा खाए है आँख नम है ,दिल फ़सुर्दा है ,जिगर आशुफ़्ता खू लाख...
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आनन्द पाठक
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[08 Mar 2010 05:50 AM]



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