मैं असलियत से वाकिफ हो चूका हूँ
हेल्लो क......, कल ही तुम्हे एक पत्र लिखा और आज फिर मजबूर हो गया हूँ और संभवतः ये मेरा आखिरी पत्र है तुम्हे. क्योंकि मैं और भ्रम में नहीं जीना चाहता. मेरा भ्रम अब टूट चूका है. मैं असलियत से वाकिफ हो चूका हूँ. किसी के होने या न होने से जिंदगी नहीं रूकती...
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अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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[08 Mar 2010 03:35 AM]



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