जब कभी अपनों की आँखों में आंसू देखता हूँ

खामोशी..बहुत कुछ कहती है जब कभी अपनों की आँखों में आंसू देखता हूँ, मेरा दिल भी रोने लगता है. तड़प हो उठता है मेरा मन. जी करता है मैं भी जार-जार रोऊँ...आज भी मैंने एक अपने बहुत अजीज को रोते हुए देखा. हुआ कुछ यों की दिल को उनके बहुत ठेष लगी, आँखों में दो बूँद उतर आये उनकी. मेरे उस... [पूरी पोस्ट]
writer अभिषेक प्रसाद 'अवि'

moments of life

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[08 Mar 2010 03:35 AM]

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