चाणक्य नीति शास्त्र-हृदय में शुद्धता में निहित है धर्म का भाव
वाचः शौचं च मनसः शौचन्द्रियनिग्रहः।
सर्वभूति दया शौचं एतच्छौत्रं पराऽर्थिनाम्।।
हिंदी में भावार्थ-वाणी की पवित्रता, मन की स्वच्छता, इंन्द्रियों पर नियंत्रण, समस्त जीवों पर दया और भौतिक साधनों की शुद्धता ही वास्तव में धर्म है।
पुष्पे गंधं तिले तैलं...
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दीपक भारतदीप
हिन्दीअभिव्यक्तिअनुभूतिअध्यात्म
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[17 Feb 2010 22:49 PM]



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