तोहफों के जाल में प्यार-हिन्दी व्यंग्य कविता (love and gift-hinci satire poem)
अब प्यार जताने का सिलसिला
तोहफों से चलने लगा है,
इसलिये आदमी तोहफे देकर
हर इंसान प्यार खरीदने लगा है।
तोहफों की कीमत जितनी बढ़ेगी,
प्यार की ऊंचाई भी उतनी लगेगी,
नजरों का दोष है कि दिल का
प्यार जाहिर करने की ख्वाहिशों के आगे
हर तोहफा सस्ता लगने लगा है,
मगर...
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दीपक भारतदीप
हिन्दीअभिव्यक्तिअनुभूतिमनोरंजन
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[21 Feb 2010 02:39 AM]



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