ऐसे लोग कम हैं-हिन्दी व्यंग्य कविता

 दीपक भारतदीप की हिंदी सरिता सभी को बताये रास्ते पर खुद चलें, ऐसे लोग कम हैं। दूसरे को सिखायें दांवपैंच, जो अजमाने में खुद बेदम हैं।। हवा के झौंके से कांपने लगता है पूरा उनका बदन, जमाने को डरपोक बतायें, अपनी बहादुरी के उनको वहम हैं।। दूसरों की रौशनी में चले हैं पूरी जिंदगी का... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

हिन्दीशायरीशेरमनोरंजन

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[21 Feb 2010 00:29 AM]

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