मासिक खाद्य वर्जनाएं
एक प्राचीन लोक-कवि घाघ द्वारा रचित एक लोकोक्ति है -
चैते गुड बैसाखे तेल, जेठे बाट असाढ़े केल !
सावन सागे भादों मही, क्वार करेला कातिक दही !!
अगहन जीरा पूसे धना, महा मिश्री फागुन चना !!! अर्थात - चैत्र (अप्रैल-मई) माह में गुड (कच्ची शक्कर), बैशाख (मई-जून)...
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देवसूफी राम कु० बंसल
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[25 Feb 2010 09:23 AM]



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