बाघ के दिल से

bhawnayen कभी तुम थर्र-थर्र कापाँ करते थें हमारी गर्जना से,आज हम तुम्हारी कदमों की आहट से घबराते हैं ।कभी तुम नज़रे नहीं मिला पाते थें हमारी नज़र से,आज हम तुम्हारा सामना करने से कतराते हैं ॥कभी तुम जागा करते थें रातो को, हमारे खौफ़ से,आज हम अपने बच्चो को सीने से... [पूरी पोस्ट]
writer dipayan
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[17 Feb 2010 14:24 PM]

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