पढ़िए रूहानी शायर "मनीष" को , रूह को न छु जाये तो कहियेगा.....
......मनीष साहब जो लिखते हैं रूह से लिखते हैं ...... रूह से पढ़िए.......रूह तक पहुचेगी आवाज...... चंद अशियार, शायद बेकार.. पर क्या करूँ यार..., कह-सुन लेता हूँ खुद से ही की शायद.....
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यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
रूहानी शायर "मनीष"
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[02 Mar 2010 16:49 PM]



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