दोषी कौन ---- खुद ही पता लगा ले (यशवंत मेहता )
बहस, वाद-विवाद करना कोई बड़ी बात नहीं हैं. मुद्दा होना चाहिए बस, महफ़िल जम जाती हैं. अक्सर दिल्ली की बसों में लोग बहस करते मिल जातें हैं. बहस सुनो तो ऐसा लगता हैं मानो सभी के विचार एक हैं. विचार तो एक हैं पर आचरण अलग-अलग हैं. आचरण एक हो तो ही समाज को दिशा...
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यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
युग क्रांति
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[06 Mar 2010 05:44 AM]



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