ओ! मेरे संत बैलेंटाइन
ओ! मेरे संत बैलेंटाइनआप ने ये कैसा प्रेम फैलायाप्रेम के नाम पर कैसा प्रेम "भार" डालाआप पहले बताएंप्यार करते हुए आप ने कभीबोला था अपने प्रिय पात्र सेकि .....आई लव यू...दिया था शानदार तोहफाया कोई ग्रीटिंग कार्डपर अब हमेंआप के इस "प्रेम दिवस" परदेना पड़ता...
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Pratibha
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[14 Feb 2010 11:13 AM]



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